पूरा व्याकरण
15 क्षेत्रों में 81 विषय। हर विषय का एक स्तर है, हिन्दी में समझाया गया है, अनुवाद के साथ उदाहरण वाक्य हैं, वह जाल है जिसमें ख़ास तौर पर हिन्दी बोलने वाले फँसते हैं, और उसके अपने अभ्यास हैं।
सीखने के रास्ते के रूप में, क्रम सेनक्शे के रूप में: काल एक समय-रेखा पर
वर्णमाला और उच्चारण
5 विषय · A1अक्षर, आवाज़ें और शब्द पर ज़ोर।
काल और भविष्य
19 विषय · A1–B1सामान्य वर्तमान, भूतकाल, पूर्ण वर्तमान, जारी रहने वाले रूप, भविष्य।
काल और उनके रूप13
- Simple Present (सामान्य वर्तमान)A1
- Present Progressive (अपूर्ण वर्तमान)A1
- Simple Present या Present Progressive?A2
- जिन क्रियाओं का -ing रूप नहीं बनताB1
- Simple Past (सामान्य भूतकाल)A2
- Past Progressive (अपूर्ण भूतकाल)A2
- Present Perfect (पूर्ण वर्तमान)A2
- Present Perfect ProgressiveB1
- Present Perfect या Simple Past?B1
- Past Perfect (पूर्ण भूतकाल)B1
- पहले की आदतें: used to और wouldB1
- क्रिया to beA1
- have और have gotA1
क्रियाएँ: मोडल, कर्मवाच्य और बाक़ी
18 विषय · A2–B1मोडल क्रियाएँ, कर्मवाच्य, शर्त वाले वाक्य, अप्रत्यक्ष कथन, -ing या to, फ़्रेज़ल वर्ब।
आर्टिकल, संज्ञा और विशेषण
25 विषय · A1–B1बहुवचन, आर्टिकल, मात्रा, सर्वनाम, विशेषण, क्रियाविशेषण, पूर्वसर्ग।
वाक्य की बनावट
10 विषय · A1–B1शब्द-क्रम, प्रश्न, नकार, संबंधवाचक वाक्य, उपवाक्य।
शैली और लेखन
4 विषय · A2–B1ज़ोर देना, बारीक अर्थ, विराम-चिह्न, बड़े अक्षर, ब्रिटिश और अमेरिकी अंग्रेज़ी।
वर्णमाला और उच्चारण
वर्णमाला और उच्चारण
5 विषयदेवनागरी में जो लिखा जाता है, लगभग वही बोला जाता है: "ा" हमेशा "आ" है और "ी" हमेशा "ई"। इसलिए हिन्दी बोलने वाले को अंग्रेज़ी की वर्तनी पहली नज़र में बेतरतीब लगती है। पर वह बेतरतीब नहीं है, बस उसके नियम दूसरे हैं: एक स्वर-अक्षर की दो ध्वनियाँ होती हैं, शब्द के आख़िर का एक मूक e उनके बीच फ़ैसला करता है, और कुछ अक्षर सदियों से बोले ही नहीं जाते। यह अध्याय सबसे पहले इसलिए है कि हर नया शब्द तब बेहतर याद रहता है जब तुम उसे शुरू से ही सही सुनते, सही बोलते और सही स्पेल कर पाते हो।
काल और भविष्य
काल और उनके रूप
13 विषयहिन्दी बोलने वाला इस हिस्से में एक फ़ायदे के साथ आता है: "वह पढ़ती है" और "वह पढ़ रही है" का फ़र्क़ उसे पहले से मालूम है, और अंग्रेज़ी में भी ठीक यही फ़र्क़ है — she reads और she is reading। मुश्किल वहाँ शुरू होती है जहाँ दोनों भाषाएँ अलग राह पकड़ती हैं। हिन्दी कहती है "वह दो साल से यहाँ रहती है", और अंग्रेज़ी इसके लिए Present Perfect माँगती है: she has lived here for two years। और know, want, understand जैसी क्रियाएँ -ing वाला रूप लेती ही नहीं — I am knowing अंग्रेज़ी में ग़लत है।
भविष्य की बात करना
6 विषयअंग्रेज़ी बारीकी से फ़र्क़ करती है कि कोई बात योजना है, अनुमान है, अभी-अभी लिया गया फ़ैसला है या पहले से किसी समय-सारणी में तय है। इस हिस्से की असली मुश्किल यही चुनाव है, रूप नहीं। हिन्दी बोलने वाला एक फ़ायदे और एक जाल के साथ आता है। फ़ायदा: तय कार्यक्रम के लिए हिन्दी भी जारी रूप लेती है — "मैं कल दिल्ली जा रहा हूँ" — ठीक अंग्रेज़ी की तरह, और "करने जा रहा हूँ" शब्दशः going to है। जाल: हिन्दी का भविष्य काल — "करूँगा, करेगी, करेंगे" — will जैसा दिखता है, पर हर काम आता है: योजना, अनुमान, वादा, और "जब मैं पहुँचूँगा" जैसे उपवाक्य भी, जहाँ अंग्रेज़ी will की इजाज़त नहीं देती।
क्रियाएँ: मोडल, कर्मवाच्य और बाक़ी
मोडल क्रियाएँ
6 विषयमोडल क्रियाएँ यह नहीं बतातीं कि क्या होता है, बल्कि यह कि बोलने वाला उसे कैसे देखता है: क्या वह संभव है, ज़रूरी है, उसकी इजाज़त है, उसकी सलाह दी जा रही है या वह बस एक अंदाज़ा है। अंग्रेज़ी में इनकी एक ख़ासियत है जो बाक़ी सब समझा देती है: ये अधूरी हैं। can का कोई भविष्य रूप नहीं, must का कोई भूतकाल नहीं, may का कोई to-रूप नहीं। हिन्दी में "सकना" और "पड़ना" आम क्रियाएँ हैं जो हर काल में बदल जाती हैं — "कर सकूँगा", "करना पड़ा" — जबकि अंग्रेज़ी में इनकी जगह दूसरे रूप आते हैं: will be able to, had to। असली सीखने की चीज़ यही बदले के रूप हैं। एक फ़र्क़ और: "मुझे जाना चाहिए", "मुझे जाना पड़ा" में व्यक्ति "मुझे" बनकर आता है; अंग्रेज़ी में वह हमेशा सीधा कर्ता है: I should go, I had to go।
कर्मवाच्य (Passive)
2 विषयअंग्रेज़ी का कर्मवाच्य सीधा-सादा बना है: to be का कोई रूप और क्रिया का तीसरा रूप, बस। हिन्दी बोलने वाले के लिए यह ढाँचा अनजाना नहीं — "चिट्ठी भेजी गई", "यहाँ अंग्रेज़ी बोली जाती है" — फ़र्क़ सहायक क्रिया का है: हिन्दी "जाना" लेती है, अंग्रेज़ी be। मुश्किल दो और बातें हैं: कर्मवाच्य कब आता है, और यह कि अंग्रेज़ी में be कभी नहीं छूटता, जबकि हिन्दी के "भेजी गई" में कोई "है" या "था" दिखाई नहीं देता।
शर्तें और कल्पनाएँ
3 विषयतीन बुनियादी ढाँचे लगभग सब कुछ ढक लेते हैं, और उन्हें अलग करने वाली चीज़ काल नहीं, बल्कि यह है कि बोलने वाला शर्त को कितना संभव मानता है। हिन्दी का "अगर … तो …" यहाँ अच्छी शुरुआत है, पर दो जगह हिन्दी की आदत उलटी दिशा में ले जाती है। पहली: हिन्दी शर्त वाले हिस्से में भविष्य काल रख देती है — "अगर कल बारिश होगी" — जबकि अंग्रेज़ी वहाँ will नहीं लेती। दूसरी: हिन्दी का "होता" — "अगर मेरे पास समय होता" — अभी की कल्पना और बीते हुए कल की कल्पना, दोनों के लिए एक ही है; अंग्रेज़ी इन्हें अलग रूपों से कहती है। और "तो" के लिए अंग्रेज़ी में आमतौर पर कोई शब्द नहीं चाहिए: अल्पविराम (comma) काफ़ी है।
अप्रत्यक्ष कथन
4 विषयजब हम किसी की कही बात आगे बताते हैं, तो हिन्दी में "कि" लगाकर काल (tense) वही रखते हैं जो बोलने वाले ने इस्तेमाल किया था: "उसने कहा कि वह थका है।" अंग्रेज़ी ऐसा नहीं करती। वह काल को एक सीढ़ी पीछे खिसका देती है, और साथ में वह सब बदल देती है जो बोलने वाले की जगह पर टिका है: व्यक्ति, जगह, समय। हिन्दी बोलने वालों को यह अटपटा लगता है, पर यह एक सीधा-सा मशीनी नियम है, और इसीलिए सीखा जा सकता है।
क्रिया के ढाँचे: -ing, to और अनियमित रूप
3 विषयजब अंग्रेज़ी में दो क्रियाएँ साथ आती हैं, तो पहली क्रिया तय करती है कि दूसरी किस रूप में आएगी: to do, doing या सिर्फ़ मूल रूप do। हिन्दी में दूसरी क्रिया लगभग हमेशा "-ना" वाले रूप में आती है — "तैरना पसंद है", "जाना चाहता हूँ", "सीखना शुरू किया" — इसलिए अंग्रेज़ी का यह बँटवारा नया लगता है। इसके कुछ मोटे नियम हैं, पर सच यह है कि इसका बड़ा हिस्सा आदत है और हर क्रिया के साथ सीखना पड़ता है। ये पन्ने कम से कम यह छाँट देते हैं कि क्या किसके साथ जाता है।
आर्टिकल, संज्ञा और विशेषण
संज्ञा, आर्टिकल और मात्रा
8 विषयअंग्रेज़ी संज्ञाओं में न लिंग है, न "लड़का, लड़के, लड़कों" जैसे बदलते रूप। इस मामले में अंग्रेज़ी हिन्दी से आसान है। मुश्किल दो दूसरी जगहों पर है। पहली: हिन्दी में आर्टिकल होते ही नहीं, जबकि अंग्रेज़ी में लगभग हर संज्ञा से पहले सोचना पड़ता है — a, an, the या कुछ भी नहीं? दूसरी: अंग्रेज़ी गिनी जा सकने वाली और न गिनी जा सकने वाली चीज़ों में साफ़ फ़र्क़ करती है, और आर्टिकल, बहुवचन और मात्रा बताने वाले लगभग सभी शब्द इसी पर टिके हैं।
सर्वनाम
7 विषयहिन्दी में "वह" एक ही शब्द है — लड़का हो, लड़की हो या किताब। अंग्रेज़ी यहाँ तीन रास्ते रखती है: he, she और it। दूसरी ओर, हिन्दी जो भेद बहुत बारीकी से करती है — तू, तुम, आप — वह अंग्रेज़ी में है ही नहीं: सबके लिए एक you। इसलिए इस हिस्से में ध्यान दो बातों पर है: जहाँ अंग्रेज़ी हिन्दी से ज़्यादा भेद करती है, और जहाँ कम।
विशेषण और क्रियाविशेषण
5 विषयहिन्दी में विशेषण बदलता है: "अच्छा लड़का", "अच्छी लड़की", "अच्छे लोग"। अंग्रेज़ी का विशेषण कभी नहीं बदलता — a good boy, a good girl, good people। यह राहत की बात है, पर अंग्रेज़ी दूसरी जगह मेहनत माँगती है: "कैसे" बताने वाले शब्द को अक्सर अपनी अलग पहचान चाहिए (-ly), तुलना के लिए कभी अंत में -er लगता है और कभी आगे more, और interesting और interested जैसे जोड़े दो अलग बातें कहते हैं।
पूर्वसर्ग
5 विषयहिन्दी में जगह, समय और दिशा बताने वाले शब्द संज्ञा के बाद आते हैं: "मेज़ पर", "घर में", "सोमवार को", "दिल्ली से"। इन्हें परसर्ग कहते हैं। अंग्रेज़ी में यही काम पूर्वसर्ग (preposition) करते हैं, और वे संज्ञा से पहले आते हैं: on the table, in the house, on Monday, from Delhi। क्रम उल्टा है, और गिनती भी अलग है: हिन्दी के एक "पर" के लिए अंग्रेज़ी में कभी on है, कभी at; एक "से" के लिए कभी from, कभी since, कभी with। इसलिए हर पूर्वसर्ग को उसके इस्तेमाल के साथ सीखना पड़ता है।
वाक्य की बनावट
वाक्य-रचना
7 विषयहिन्दी में क्रिया वाक्य के आख़िर में आती है: "राम ने किताब पढ़ी" — कर्ता, कर्म, क्रिया। अंग्रेज़ी में क्रिया बीच में आती है: Ram read the book — कर्ता, क्रिया, कर्म। यह इस हिस्से का सबसे बड़ा फ़र्क़ है। हिन्दी "ने" और "को" से बताती है कि कौन क्या कर रहा है, इसलिए शब्द आगे-पीछे हो सकते हैं। अंग्रेज़ी में ऐसे निशान नहीं हैं; वहाँ जगह ही मतलब तय करती है। और प्रश्न और नकार में अंग्रेज़ी एक ऐसा शब्द माँगती है जो हिन्दी में है ही नहीं: do।
उपवाक्य और जोड़ने वाले शब्द
3 विषयB1 स्तर पर बात छोटे-छोटे अलग वाक्यों से आगे बढ़ती है। वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं "जो" वाले उपवाक्य, "जब" और "जैसे ही" वाले उपवाक्य, और कारण और नतीजा बताने वाले शब्द। हिन्दी में ये अक्सर जोड़ी में आते हैं — "जो … वह", "जब … तब", "क्योंकि … इसलिए"। अंग्रेज़ी में ज़्यादातर एक ही शब्द काफ़ी होता है, और दूसरा जोड़ देने से वाक्य ग़लत हो जाता है। दूसरी बात: अंग्रेज़ी में शब्द का प्रकार तय करता है कि उसके बाद क्या आएगा — because के बाद पूरा वाक्य, because of के बाद सिर्फ़ संज्ञा। हिन्दी यही बँटवारा "क्योंकि" और "की वजह से" से करती है, इसलिए विचार नया नहीं है।
शैली और लेखन
लिखावट और विराम-चिह्न
4 विषयइस हिस्से का बोलने से कोई लेना-देना नहीं — पर लिखे हुए संदेश में यही बातें सबसे पहले दिखती हैं। देवनागरी लिखने वाले के लिए यहाँ तीन चीज़ें बिल्कुल नई हैं: बड़े और छोटे अक्षर, जो देवनागरी में होते ही नहीं; अपॉस्ट्रॉफ़ी (’), जिसकी हिन्दी को ज़रूरत नहीं पड़ती; और वाक्य के अंत में खड़ी पाई (।) की जगह बिंदु (.)। अच्छी बात यह है कि इनमें से कोई नियम कठिन नहीं, और संख्याओं में दशमलव बिंदु भारत की तरह ही लिखा जाता है।