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जर्मन व्याकरण, शुरू से आख़िर तक

16 क्षेत्रों में 108 विषय। हर विषय का एक स्तर है, हिन्दी में समझाया गया है, अनुवाद के साथ उदाहरण वाक्य हैं, वह जाल है जिसमें ख़ास तौर पर हिन्दी बोलने वाले फँसते हैं, और उसके अपने अभ्यास हैं।

सीखने के रास्ते के रूप में, क्रम सेनक्शे के रूप में: काल एक समय-रेखा पर

वर्णमाला और उच्चारण

5 विषय · A1

अक्षर, आवाज़ें, बलाघात।

काल और संभावनार्थ

11 विषय · A1–B1

वर्तमान, पूर्ण वर्तमान, भूतकाल, भविष्य, संभावनार्थ।

क्रिया: रूप, सहायक भाव-क्रियाएँ, कर्मवाच्य

17 विषय · A1–B1

वर्तमान के रूप, अलग होने वाली क्रियाएँ, आज्ञार्थ, भाव-क्रियाएँ, कर्मवाच्य।

कारक, संज्ञा, आर्टिकल

47 विषय · A1–B1

चार कारक, तीन लिंग, बहुवचन, आर्टिकल, सर्वनाम, विशेषण, पूर्वसर्ग।

वाक्य-रचना

21 विषय · A1–B1

शब्द-क्रम, उपवाक्य, नकार।

बारीकियाँ और शैली

7 विषय · A1–B1

जोड़ने वाले शब्द, du और Sie, संख्याएँ, अल्पविराम, बड़े अक्षर।

वर्णमाला और उच्चारण

वर्णमाला और उच्चारण

5 विषय

जर्मन की वर्तनी अंग्रेज़ी से कहीं ज़्यादा नियमित है — लगभग उतनी ही, जितनी हिन्दी की। नियम आ गए, तो अनदेखा शब्द भी ज़ोर से पढ़ सकते हो, और सुना हुआ ज़्यादातर शब्द लिख सकते हो। अक्षर वही छब्बीस लैटिन अक्षर हैं, और उनके ऊपर ä, ö, ü और ß। मुश्किल यह है कि हम ये अक्षर अंग्रेज़ी से जानते हैं, और जर्मन में कई अक्षर दूसरी आवाज़ देते हैं: w "व" है, v ज़्यादातर "फ़", z "त्स", j "य", और ei "आइ"। अच्छी ख़बर भी है: हिन्दी में छोटे-लंबे स्वर (इ-ई, उ-ऊ), शुद्ध "ए" और "ओ", और उर्दू शब्दों वाले "ख़" और "ग़" पहले से हैं — जर्मन को इन सबकी ज़रूरत है। यह अध्याय सबसे पहले पढ़ने लायक़ है, क्योंकि जो शब्द दिमाग़ में सही सुनाई दे, वह आसानी से याद रहता है।

काल और संभावनार्थ

काल

8 विषय

जर्मन में काग़ज़ पर छह काल हैं और बोलचाल में काम के बहुत कम। वर्तमान वर्तमान का काम करता है और भविष्य का भी ज़्यादातर। Perfekt लगभग पूरा भूतकाल सँभालता है। Präteritum लिखा जाता है, बोला नहीं — कुछ क्रियाओं को छोड़कर। हिन्दी बोलने वाले "गया", "गया है" और "गया था" का फ़र्क़ लेकर आते हैं और जर्मन में भी वैसे ही तीन ढूँढते हैं। वे वहाँ नहीं हैं: Ich bin gegangen "मैं गया" भी है और "मैं गया हूँ" भी, और "मैं कल बाज़ार गया था" भी आम तौर पर यही। यह उम्मीद जल्दी छोड़ दो, तो उस फ़र्क़ को ढूँढने में बहुत समय बचेगा जो है ही नहीं।

A1पूर्ण भूतकाल (Perfekt)haben या sein और अंत में एक कृदंत — और जर्मन लोग कल के बारे में ऐसे ही बात करते हैं। B1सामान्य भूतकाल (Präteritum)किताबों और रिपोर्टों का भूतकाल — और कुछ क्रियाएँ, जो बोलचाल में भी इसे लेती हैं। A2भविष्य कालजर्मन भविष्य आम तौर पर वर्तमान काल में कहती है, और werden अनुमान और ज़ोर के लिए रखती है। B1पूर्व भूतकाल (Plusquamperfekt)hatte या war और एक कृदंत — उसके लिए जो किसी दूसरी बात के होने तक हो चुका था। A2वर्तमान काल क्या-क्या ढकता हैअभी, हमेशा, कल और कब से — सब एक रूप में। A2Perfekt में haben या seinज़्यादातर क्रियाएँ haben लेती हैं; गति और हालत का बदलना sein, और सीधा कर्म हमेशा haben। A2कब: seit, vor, in, fürसमय के चार पूर्वसर्ग, जिनके अंग्रेज़ी जोड़ एक-दूसरे में घुसते हैं, और हर एक के साथ आने वाला काल। A2भूत कृदंत बनानातीन ढाँचे, दो मामले बिना ge- के, और एक जहाँ यह अंदर चला जाता है।

संभावनार्थ

3 विषय

जर्मन में दो संभावनार्थ हैं और वे बिलकुल अलग काम करते हैं। Konjunktiv II वह है जिसकी हर सीखने वाले को ज़रूरत है: वह किसी बात को काल्पनिक बताता है, और जर्मन शिष्टता भी इसी से बनती है। Ich hätte gern, könnten Sie, ich würde sagen — शुरुआती पहले ही हफ़्ते में इससे मिलता है, बिना बताए कि यह क्या है। हिन्दी बोलने वाले इसे पहले से जानते हैं, बस दूसरे नाम से: "अगर मेरे पास समय होता, तो मैं आता" — "होता" और "आता" ठीक hätte और würde kommen हैं। Konjunktiv I अप्रत्यक्ष कथन का रूप है, और ज़्यादातर सीखने वालों के लिए पढ़ने का हुनर है, लिखने का नहीं: यह ख़बरों और कार्यवृत्त में आता है, और बताता है कि बात किसी और की है।

क्रिया: रूप, सहायक भाव-क्रियाएँ, कर्मवाच्य

क्रिया: वर्तमान काल और मूल

11 विषय

हिन्दी क्रिया तीन बातें बताती है: पुरुष, वचन और लिंग — "वह आता है", "वह आती है", "वे आते हैं"। जर्मन क्रिया सिर्फ़ पुरुष और वचन बताती है; लिंग से उसका कोई लेना-देना नहीं: er kommt, sie kommt — एक ही रूप। वर्तमान काल में छह रूप और चार अलग अंत हैं, और वे लगभग हर क्रिया पर वही हैं; दो हफ़्ते बाद तुम उनके बारे में सोचना छोड़ दोगे। ध्यान दूसरी जगह चाहिए। sein और haben अनियमित हैं और पहले दिन से चाहिए — और हिन्दी में haben जैसी कोई क्रिया ही नहीं है। कुछ मज़बूत क्रियाएँ du और er रूपों में अपना स्वर बदलती हैं। और अलग होने वाली क्रियाएँ दो टुकड़ों में बँट जाती हैं और अपना उपसर्ग वाक्य के अंत में भेज देती हैं।

A1वर्तमान कालमूल पर चार अंत — और एक काल, जो हिन्दी के दो कालों का काम करता है। A1sein और haben: होना और रखनाअनियमित, टाली नहीं जा सकतीं, और दो बार ज़रूरी — क्रिया के रूप में और भूतकाल की मशीन के रूप में। A1अलग होने वाली क्रियाएँक्रिया वाक्य शुरू करती है और ख़त्म भी, और अर्थ आख़िरी शब्द तक पूरा नहीं होता। A2मज़बूत क्रियाएँलगभग दो सौ क्रियाएँ अपना स्वर बदलती हैं — और कुछ ढाँचों में बदलती हैं। A2आज्ञार्थ"तुम/आप" के तीन रूपों के लिए तीन रूप — और एक छोटा शब्द, जो हुक्म को न्योता बना देता है। B1तय पूर्वसर्ग वाली क्रियाएँपूर्वसर्ग क्रिया का हिस्सा है, और उसका कारक भी — दोनों में से कुछ भी अंदाज़े से नहीं निकलता। B1हमेशा निजवाचक रहने वाली क्रियाएँक्रियाओं का एक समूह, जिनका निजवाचक सर्वनाम कर्म है ही नहीं — वह क्रिया का हिस्सा है। A2न अलग होने वाली क्रियाएँ: be-, ver-आठ बिना ज़ोर वाले उपसर्ग, जो जुड़े रहते हैं और कृदंत में ge- नहीं लेते। B1zu के साथ और बिना zu के मूल रूपज़्यादातर क्रियाओं को दूसरे मूल रूप से पहले zu चाहिए; मोडल क्रियाओं और एक छोटी सूची को नहीं। B1मिश्रित क्रियाएँ: bringen, brachteएक छोटा समूह, जो कमज़ोर -t अंत लेता है और फिर भी स्वर बदलता है। B1अकर्तृक क्रियाएँ: es regnetमौसम, हालतें और भावनाएँ, जो किसी के साथ होती हैं, कोई उन्हें करता नहीं।

मोडल क्रियाएँ

5 विषय

जर्मन में छह मोडल क्रियाएँ हैं — können, müssen, dürfen, sollen, wollen, mögen — और वे लगभग हिन्दी के "सकना", "पड़ना", "चाहना" जैसा काम करती हैं: मोडल क्रिया बदलती है, मुख्य क्रिया अपने मूल रूप में अंत में जाती है, और बीच में कोई zu नहीं आता। हिन्दी में भी "मैं आ सकता हूँ" में "आ" बिना बदले रहता है। दो बातें अलग हैं। पहली: हिन्दी "मुझे जाना है", "मुझे जाना चाहिए" में व्यक्ति "मुझे" होता है; जर्मन में वह हमेशा कर्ता है: ich muss gehen, ich sollte gehen। दूसरी: नकार में müssen का अर्थ "मना है" नहीं — ich muss nicht का अर्थ है "ज़रूरत नहीं"। "मना है" के लिए nicht dürfen है, और दोनों को मिलाने से इजाज़त मनाही बन जाती है।

कर्मवाच्य

1 विषय

जर्मन अपना कर्मवाच्य werden से बनाती है, sein से नहीं: Das Haus wird gebaut — "घर बनाया जा रहा है"। हिन्दी बोलने वालों के लिए यह फ़र्क़ जाना-पहचाना है, क्योंकि हिन्दी भी दो रूप रखती है: "घर बनाया जा रहा है" (काम चल रहा है) और "घर बना हुआ है" (काम पूरा है)। जर्मन में पहला wird gebaut है और दूसरा ist gebaut। अंग्रेज़ी दोनों के लिए "इज़ बिल्ट" कहती है और संदर्भ पर छोड़ देती है; जर्मन और हिन्दी दोनों अलग करती हैं।

कारक, संज्ञा, आर्टिकल

चार कारक

8 विषय

हिन्दी बोलने वालों के लिए कारक कोई नई चीज़ नहीं। "लड़के ने", "लड़के को", "लड़के से", "लड़के का" — संज्ञा के बाद एक परसर्ग आता है और बताता है कि वाक्य में उसका काम क्या है। इसीलिए हिन्दी में शब्दों का क्रम काफ़ी आज़ाद है: "कुत्ते को आदमी ने देखा" और "आदमी ने कुत्ते को देखा" एक ही बात कहते हैं। जर्मन भी ठीक यही करती है, बस निशान दूसरी जगह लगाती है: संज्ञा के बाद नहीं, संज्ञा से पहले, आर्टिकल पर। Der Hund sieht den Mann और Den Mann sieht der Hund — दोनों में कुत्ता देख रहा है। जर्मन में चार कारक हैं, और उनके नाम लगभग हर किताब में जर्मन में ही आते हैं: Nominativ, Akkusativ, Dativ, Genitiv। यहाँ भी यही नाम इस्तेमाल होंगे।

A1कारक: एक नज़र मेंसंज्ञा के चार काम, अंतों के चार सेट — और एक तालिका, जो सबसे पहले सीखने लायक़ है। A1Nominativ — कर्ता का कारकजो काम करता है — और जिससे क्रिया मेल खाती है। A1Akkusativ — कर्म का कारकएक आर्टिकल बदलता है, और वही एक बदलाव Akkusativ का ज़्यादातर हिस्सा है। A1Dativ — पाने वाले का कारककिसे, किसके लिए — और कुछ तय पूर्वसर्गों और कुछ तय क्रियाओं के बाद। B1Genitiv — संबंध का कारकलिखित जर्मन इसे इस्तेमाल करती है; बोलचाल ज़्यादातर von + Dativ कहती है। B1एक वाक्य में दो कर्मव्यक्ति Dativ में, चीज़ Akkusativ में — और पहले कौन आए, यह इस पर निर्भर है कि वे संज्ञा हैं या सर्वनाम। A2Dativ वाली क्रियाएँकुछ क्रियाएँ, जिनका इकलौता कर्म Dativ में होता है। B1Genitiv की जगह vonबोलचाल की जर्मन Genitiv की जगह von + Dativ कहती है, लिखित नहीं।

संज्ञा: लिंग, बहुवचन, समास

9 विषय

हिन्दी बोलने वाले के लिए जर्मन संज्ञा उतनी अजीब नहीं जितनी किसी अंग्रेज़ी बोलने वाले के लिए। हिन्दी में भी हर संज्ञा का लिंग होता है, और "मेज़" स्त्रीलिंग है बिना किसी अर्थ के। हिन्दी में भी बहुवचन शब्द के अंत और लिंग पर निर्भर करता है: लड़का से लड़के, किताब से किताबें। फ़र्क़ दो हैं। जर्मन में लिंग तीन हैं, और वे हिन्दी से मेल नहीं खाते — इसलिए हर संज्ञा उसके आर्टिकल और बहुवचन के साथ सीखनी पड़ती है। और अच्छी ख़बर इस अध्याय के आख़िर में है: जर्मन नए शब्द पुराने शब्दों को जोड़कर बनाती है, ठीक जैसे हिन्दी "डाकघर" या "रसोईघर" बनाती है — इसलिए जो लंबे शब्द को तोड़ना जानता है, वह ऐसा शब्द भी पढ़ लेता है जो किसी ने सिखाया नहीं।

A1तीन लिंगचीज़ का गुण नहीं — शब्द का गुण। A1बहुवचनकोई तय नियम नहीं। बहुवचन संज्ञा के साथ सीखा जाता है, लिंग की तरह। A2समास: जुड़े हुए शब्दआख़िरी हिस्सा बताता है कि चीज़ क्या है, पहले वाले हिस्से कि कौन-सी। B1कमज़ोर पुल्लिंग संज्ञाएँपुल्लिंग संज्ञाओं का एक छोटा समूह, जो एक को छोड़ हर कारक में -n लेता है — और ये रोज़ के शब्द हैं। B1संज्ञा बनाना: das Essenहर क्रिया का मूल रूप नपुंसकलिंग संज्ञा बन सकता है, और हर विशेषण ऐसी संज्ञा जो अंत लेती रहती है। A2लघुता के रूप: -chen और -leinदो अंत, जो संज्ञा को छोटा करते हैं, नपुंसकलिंग बना देते हैं और कभी-कभी अर्थ ही बदल देते हैं। A2अंत से लिंग का अंदाज़ालगभग दर्जन भर अंत लिंग सीधे तय करते हैं, और ये शब्दावली का बड़ा हिस्सा ढक लेते हैं। B1समास में जोड़ने वाले -s- और -n-समास के दो हिस्सों के बीच आने वाले -s और -n, और वे क्या नहीं हैं। B1उधार के शब्द और उनके बहुवचन-s वाला बहुवचन उधार के शब्दों का है, और यूनानी-लातिनी शब्द अपने अंत रखते हैं।

आर्टिकल

7 विषय

हिन्दी में आर्टिकल होता ही नहीं। "किताब मेज़ पर है" कहने के लिए किताब से पहले कुछ नहीं चाहिए। जर्मन में लगभग हर संज्ञा से पहले एक आर्टिकल आता है, और वही बताता है कि संज्ञा पुल्लिंग है, स्त्रीलिंग है या नपुंसकलिंग, एकवचन है या बहुवचन, और वाक्य में उसका काम क्या है। हिन्दी में यह आख़िरी काम परसर्ग करते हैं — को, से, का, में — और वे संज्ञा के बाद आते हैं। जर्मन में यह जानकारी संज्ञा से पहले, आर्टिकल में बैठी है। निश्चित आर्टिकल der, die, das किसी जानी-पहचानी चीज़ के लिए है, अनिश्चित ein, eine किसी नई चीज़ के लिए — मोटे तौर पर "वह" और "एक"। दोनों के बीच एक दिलचस्प फ़र्क़ है: ein के तीन रूपों में कोई अंत नहीं होता — ein Mann, ein Kind — और ठीक यही खाली जगह बाद में विशेषण भरता है।

A1निश्चित आर्टिकलसोलह काम, पर अलग-अलग शब्द सिर्फ़ छह — तालिका जितनी डराती है, उतनी मुश्किल नहीं। A1ein, kein और अधिकारवाचक शब्दनौ शब्द, एक ही ढाँचा — और तीन खाने जहाँ कोई अंत नहीं। B1जहाँ जर्मन आर्टिकल लगाती है और हिन्दी नहींभाववाचक संज्ञा, मौसम, खाना और शरीर के अंग आर्टिकल लेते हैं — और पेशे अपना आर्टिकल खो देते हैं। A2आर्टिकल छोड़नापेशे, राष्ट्रीयता, पदार्थ और भाववाचक संज्ञाएँ अक्सर बिना आर्टिकल के आती हैं। A1जुड़े हुए रूप: im, zum, amलगभग दस जुड़े हुए रूप, जो शॉर्टकट नहीं, बात कहने का सामान्य तरीक़ा हैं। A1अधिकारवाचक: mein, dein, sein, ihrसात अधिकारवाचक शब्द, सब ein की तरह — और एक शब्द जो "उसकी", "उनका" और आदर वाला "आपका" तीनों है। A2संकेतवाचक: dieser, derजर्मन dieser से इशारा करती है — और सबसे ज़्यादा ज़ोर दिए गए der से, जो लोग सच में बोलते हैं।

सर्वनाम

8 विषय

हिन्दी सर्वनाम भी कारक के साथ बदलते हैं: "मैं", "मुझे", "मेरा"; "वह", "उसे", "उसका"। इसलिए जर्मन सर्वनामों का विचार जाना-पहचाना है: ich, mich, mir। नई बात यह है कि जर्मन तीसरे पुरुष में लिंग बताती है। हिन्दी का "वह" आदमी, औरत और चीज़ तीनों के लिए है; जर्मन में er, sie या es चुनना पड़ता है — और चीज़ों के लिए भी, उनके आर्टिकल के हिसाब से। दो सर्वनाम ऐसे हैं जिनका हिन्दी में कोई सीधा जोड़ नहीं। man एक बिलकुल तटस्थ, सामान्य कर्ता है — "लोग", "कोई भी"। और es कई ढाँचों में एक ख़ाली जगह-भराऊ की तरह आता है, जहाँ हिन्दी कुछ भी नहीं कहती: es regnet — "बारिश हो रही है"।

A1पुरुषवाचक सर्वनामहर एक के तीन कारक, और Dativ वाले रूप उम्मीद से कहीं ज़्यादा इस्तेमाल होते हैं। A2निजवाचक सर्वनामजर्मन क्रियाओं का एक बड़ा समूह एक सर्वनाम साथ रखता है, जिसका अनुवाद कुछ भी नहीं होता। B1सामान्य कर्ता: man, esएक किसी के भी लिए है; दूसरा किसी के लिए नहीं, बस एक जगह भरता है। B1संबंधवाचक और संकेतवाचक सर्वनामवही छह शब्द आर्टिकल का, संबंधवाचक सर्वनाम का और संज्ञा की पूरी जगह लेने वाले संकेतवाचक का काम करते हैं। B1सर्वनाम es और उसके इस्तेमालएक कर्ता जो किसी चीज़ के लिए नहीं, एक जगह-भराऊ जो ग़ायब हो जाता है, और वह ढाँचा जो हर सीखने वाले को चाहिए: es gibt। A2अनिश्चयवाचक सर्वनाम: jemandअनिश्चित लोगों और चीज़ों के लिए सर्वनामों का एक छोटा सेट, और वे अंत जो इनमें से कुछ अब भी लेते हैं। A2प्रश्नवाचक शब्द: wer, wen, wemwer ठीक der की तरह कारक बदलता है, और "कौन-सा" पूछने के दो अलग शब्द हैं। B1अकेले आने वाले अधिकारवाचक: meinsजब संज्ञा छोड़ दी जाए, तो अधिकारवाचक der वाले अंत ले लेता है।

विशेषण

7 विषय

हिन्दी बोलने वाले विशेषण के बदलने से परिचित हैं: "अच्छा लड़का", "अच्छी लड़की", "अच्छे लड़के", "अच्छे लड़कों को"। जर्मन विशेषण भी संज्ञा से पहले बदलते हैं, और अंत तीन बातों पर एक साथ निर्भर है — लिंग, कारक, और आगे कौन-सा आर्टिकल है। यह आख़िरी बात हिन्दी में नहीं है, और ज़्यादातर सीखने वाले इसे सबसे बाद में ठीक कर पाते हैं। अच्छी ख़बर दूसरी जगह है, और यहाँ हिन्दी की आदत उलटी पड़ती है: sein, werden या bleiben के बाद जर्मन विशेषण कभी अंत नहीं लेता। हिन्दी "लड़की अच्छी है" कहती है; जर्मन Das Mädchen ist gut — कोई बदलाव नहीं। विशेषण का आधा इस्तेमाल मुफ़्त है।

A1sein के बाद विशेषणsein, werden और bleiben के बाद विशेषण कभी नहीं बदलता — इसलिए यही जगह पहले सीखो। B1विशेषण के अंततीन तालिकाओं की जगह एक सिद्धांत: अंत वहाँ आता है जहाँ आर्टिकल कुछ नहीं कहता। A2तुलनात्मक और उत्तमावस्थाजर्मन में "ज़्यादा दिलचस्प" नहीं होता — हर विशेषण अंत लेता है, चाहे जितना लंबा हो। B1संज्ञा की तरह इस्तेमाल होने वाले विशेषणजर्मन विशेषण को बड़ा अक्षर देकर संज्ञा बना देती है — और वह हमेशा अपने विशेषण वाले अंत रखता है। A2तुलना करना: so wie, alsबराबरी के लिए wie, फ़र्क़ के लिए als — और इन्हें मिलाना जर्मन बोलने वालों की भी सबसे आम ग़लती है। B1बिना आर्टिकल के विशेषण के अंतआगे कोई आर्टिकल न हो, तो विशेषण आर्टिकल के अपने अंत ले लेता है। A2क्रियाविशेषण के रूप में विशेषणएक ही शब्द चीज़ का भी वर्णन करता है और काम का भी, बिना किसी जोड़ और बिना अंत के।

पूर्वसर्ग

8 विषय

हिन्दी में परसर्ग संज्ञा के बाद आते हैं: "मेज़ पर", "घर में", "बस से"। जर्मन में पूर्वसर्ग पहले आते हैं — auf dem Tisch, im Haus, mit dem Bus — और हर एक एक कारक तय करता है, जिस पर कोई मोल-भाव नहीं: mit हमेशा Dativ, für हमेशा Akkusativ। इसलिए पूर्वसर्ग अपने कारक के साथ सीखा जाता है, जैसे संज्ञा अपने आर्टिकल के साथ। हिन्दी बोलने वालों का ख़ास जाल यह है कि एक हिन्दी परसर्ग कई जर्मन शब्दों का काम करता है: "से" जर्मन में aus, von, mit, seit या als हो सकता है, और "में" in के दोनों कारक। नौ पूर्वसर्ग दोनों कारक लेते हैं, और कौन-सा, इसका अर्थ है: Dativ बताता है कि चीज़ कहाँ है, Akkusativ कि कहाँ जा रही है।

A1Akkusativ वाले पूर्वसर्गपाँच शब्द, एक कारक, कोई अपवाद नहीं — एक पंक्ति की तरह याद करने लायक़। A1Dativ वाले पूर्वसर्गवे सात, जो रोज़ की जर्मन का ज़्यादातर बोझ उठाते हैं — और उनके साथ आने वाले जुड़े रूप। A2दो कारकों वाले पूर्वसर्ग: in, aufजगह के लिए Dativ, गति के लिए Akkusativ — एक सवाल, जो नौ के नौ तय कर देता है। B1Genitiv वाले पूर्वसर्गलिखित जर्मन का स्तर — और एक साफ़ मामला, जहाँ बोलचाल आगे बढ़ चुकी है। B1क्रिया के साथ जुड़े पूर्वसर्गपूर्वसर्ग क्रिया का हिस्सा है, कारक तय करता है, और लगभग कभी हिन्दी परसर्ग से मेल नहीं खाता। A2कहीं जाना: nach, zu, in, aufमंज़िल के लिए चार पूर्वसर्ग, जगह की क़िस्म देखकर चुने हुए। A2कहीं होना: in, an, auf, beiजगह के चार पूर्वसर्ग, और वह जो जर्मन "किसी के यहाँ" के लिए इस्तेमाल करती है। A2कहीं से आना: aus और vonअंदर थे तो aus, बस पास थे तो von — in और zu का आईना।

वाक्य-रचना

शब्द-क्रम

7 विषय

हिन्दी में क्रिया वाक्य के अंत में आती है: "मैं कल बर्लिन जा रहा हूँ"। जर्मन मुख्य वाक्य में एक ही जगह पूरी तरह तय है: बदलने वाली क्रिया दूसरे हिस्से के रूप में आती है। Ich fahre morgen nach Berlin. बाक़ी सब हिल सकता है, और उसके हिलने के कारण होते हैं — जो पता है वह पहले, जो नया है वह बाद में। हिन्दी बोलने वाले की सबसे आम ग़लती क्रिया को आदत से अंत में रखना है: Ich morgen nach Berlin fahre। अच्छी ख़बर यह कि क्रिया के अलावा हिन्दी और जर्मन का क्रम बहुत मिलता-जुलता है — कब, क्यों, कैसे, कहाँ — और उपवाक्य में जर्मन क्रिया भी हिन्दी की तरह अंत में चली जाती है।

A1दूसरी जगह पर क्रियाक्रिया से पहले एक हिस्सा — जो चाहो, पर सिर्फ़ एक। A2बीच का हिस्सा: पुराना पहले, नया बाद मेंआज़ाद नहीं, पर किसी खाने से नहीं, एक सिद्धांत से तय: जानी हुई चीज़ें पहले, नई बाद में। A1प्रश्नकोई अलग सहायक शब्द नहीं — क्रिया बस आगे खिसक जाती है। B1वाक्य का कोष्ठकक्रिया उपवाक्य खोलती है और कुछ उसे बंद करता है — और बाक़ी सब बीच में रहता है। B1क्रियाविशेषणों का क्रम: TeKaMoLoजब कई जानकारियाँ मिलती हैं, तो जर्मन का एक सामान्य क्रम है: कब, क्यों, कैसे, कहाँ। A1निर्देश देनाआज्ञार्थ के तीन रूप, जिनमें से एक अपना सर्वनाम रखता है और दो छोड़ देते हैं। A2पहली जगह (Vorfeld)क्रिया से पहले ठीक एक हिस्सा — और कौन-सा, यह एक फ़ैसला है, कोई रस्म नहीं।

उपवाक्य

8 विषय

जर्मन उपवाक्य अपनी बदलने वाली क्रिया को आख़िरी जगह पर भेज देता है: Ich weiß, dass er morgen kommt. हिन्दी बोलने वालों को यह अजीब नहीं लगेगा: "मुझे पता है कि वह कल आ रहा है" — "कि" के बाद भी हिन्दी क्रिया अंत में रखती है। यही पूरा नियम है, और यह dass, weil, wenn, ob, obwohl, während से, किसी प्रश्नवाचक शब्द से या संबंधवाचक सर्वनाम से शुरू होने वाले हर उपवाक्य पर लागू होता है। अल्पविराम भी वैकल्पिक नहीं। जर्मन अल्पविराम ठहराव नहीं, उपवाक्य की सीमा दिखाता है, इसलिए उपवाक्य हमेशा अलग किया जाता है — और यह अल्पविराम संकेत है कि क्रिया अब दूर अंत में मिलेगी।

A2dass, weil, wenn: अंत में क्रियातीन सबसे आम संयोजक, और वह एक जगह जो तीनों बनाते हैं। B1संबंधवाचक उपवाक्यसंबंधवाचक सर्वनाम आर्टिकल जैसा दिखता है, लिंग एक उपवाक्य से और कारक दूसरे से लेता है, और कभी छोड़ा नहीं जा सकता। B1अप्रत्यक्ष प्रश्न और zu वाले उपवाक्यवाक्य के अंदर का सवाल सवाल नहीं रहता — और जिस उपवाक्य का अपना कर्ता न हो, वह zu लेता है। B1संयोजक और शब्द-क्रमपाँच संयोजक कुछ नहीं बदलते; बाक़ी हर एक क्रिया को अंत में भेजता है। B1उद्देश्य: um … zu, damitउद्देश्य बताने के दो तरीक़े, और एक नियम तय करता है कौन-सा: दोनों हिस्सों का कर्ता एक है या नहीं। A2कब: als, wenn, wannहिन्दी के "कब" और "जब" के लिए तीन जर्मन शब्द, जो एक सवाल से अलग होते हैं: भूतकाल में एक बार, या बार-बार? A2कारण बताना: weil, da, denn"क्योंकि" के तीन शब्द, और हर एक क्रिया को अलग जगह रखता है। B1शर्त वाले उपवाक्य: wenn और falls"अगर" के दो शब्द, जिनमें से एक "जब" भी है — और एक तीसरा रूप जो शब्द ही छोड़ देता है।

नकार

6 विषय

हिन्दी "नहीं" से लगभग सब कुछ नकारती है: "मैं नहीं आ रहा", "मेरे पास गाड़ी नहीं है"। जर्मन दो शब्दों से नकारती है, और उनमें चुनाव पहला सवाल है, बाद की बात नहीं। Kein संज्ञा को नकारता है; nicht बाक़ी सबको। Ich habe kein Auto, पर ich fahre nicht। फिर दूसरा सवाल: nicht कहाँ खड़ा हो। यहाँ हिन्दी मदद करती है — जैसे हिन्दी "नहीं" अंत की क्रिया से ठीक पहले रखती है ("मैंने उसे कल नहीं देखा"), वैसे ही जर्मन nicht बीच के हिस्से के अंत में, वाक्य बंद करने वाली चीज़ से पहले: Ich habe ihn gestern nicht gesehen। और अगर वह किसी एक शब्द को नकार रहा हो, तो ठीक उस शब्द से पहले। जगह शैली नहीं; वही बताती है कि वाक्य का कितना हिस्सा नकारा जा रहा है।

बारीकियाँ और शैली

बारीकियाँ और शैली

7 विषय

यहाँ तक की हर चीज़ तय करती है कि वाक्य सही है या नहीं। यह अध्याय तय करता है कि वह जर्मन जैसा सुनाई देता है या नहीं। ज़्यादातर काम दो चीज़ें करती हैं: छोटे-छोटे जोड़ने वाले और भाव वाले शब्द, जो हिन्दी में "तो", "ही", "भी", "ज़रा" जैसे शब्दों का काम करते हैं, और शब्द-निर्माण, जिससे जर्मन बोलने वाला मौक़े पर नई संज्ञा बना लेता है और समझा जाता है। साथ में कुछ व्यावहारिक बातें: आदर और अपनापन (du और Sie), संख्याएँ और समय, बड़े अक्षर, अल्पविराम और वर्तनी। इनमें से कुछ भी शब्दकोश में आसानी से नहीं मिलता।

B1जोड़ने वाले शब्द: deshalb, trotzdemवे क्रियाविशेषण जो वाक्यों को जोड़ते हैं और पहली जगह लेते हैं, इसलिए क्रिया कर्ता से आगे आ जाती है। A2औपचारिक और अनौपचारिक: du, Sieजर्मन हर उस वाक्य में औपचारिकता का स्तर चुनवाती है जो तुम किसी से कहते हो। A1संख्याएँ, तारीख़ें और समयतीन नियमित तंत्र — और हिन्दी बोलने वालों के लिए तीनों उतने अजीब नहीं जितने अंग्रेज़ी बोलने वालों के लिए। B1बड़े अक्षरजर्मन हर संज्ञा को बड़े अक्षर से लिखती है — और मुश्किल यह तय करना है कि संज्ञा क्या गिनी जाए। B1अल्पविराम कहाँ आता हैजर्मन अल्पविराम व्याकरण का है, लय का नहीं: उपवाक्य की सीमा पर वह आता है, कोई रुके या न रुके। A1वर्तनी और उच्चारणजर्मन वर्तनी लगभग नियमित है, इसलिए लिखा शब्द बताता है कि कैसे बोला जाए — आठ नियम जान लिए, तो। B1दो हिस्सों वाले संयोजक: entweder … oderपाँच जोड़े, जो दो विकल्पों या दो जोड़ों को घेरते हैं — और वाक्य शुरू करते समय पहला हिस्सा शब्द-क्रम तय करता है।